विवाह न करने वालों की सोच

दोस्तो विवाह न करने वाले साधु महात्मा और ढोगी के बारे मे आप ने सुना होगा लेकिन ये एक साधारण पुरूष की बात है अपने जीवन मे उसने विवाह नही किया 40 की उम्र मे अनाथ आश्रम से 4 और 6 उम्र के दो लड़को को गोद लिया।

उन दो लड़को और अपने माता -पिता के साथ गॉव छोड़कर शहर मे रहकर लड़को को अच्छी शिक्षा और संस्कार दिलाया दोनो लड़के अच्छी पोस्ट जॉब कर रहे और पिता और दादा दादी का एक सगे पुत्र से भी कही ज्यादा आदर और सम्मान करते है

मेरी उस आदमी से मुलाकात हरियाणा के एक कंपनी मे हुई एक दिन वो बातो ही बातो मे बताने लगा इतनी बात उस जानने के मैने उस से पुछा कि तुम ने विवाह न करने का फैसला क्यो किया जो कुछ तुमने गोद लिये लड़को के साथ किया वो तो तुम विवाह के बाद अपने बच्चे पैदा कर के भी कर सकते थे

तब उसका पहला शब्द था मै नपुन्सक(नामर्द) नही हूँ  मै बोला तो फिर

वो बताया कि मै गरीबी के कारण हरियाणा कमाने 10 वर्ष की उम्र मे आया था 20 की उम्र मे विवाह का मन था लेकिन मैने जितने विवाहित लोगो को देखा रोते हुए विवाह का रोना तो है साथ ही अपने बच्चो की परवरिस नही कर पाने का भी रोना था

ये विवाह जितना प्यारा लगता हे समय बितने पर दुखदायी बन जाता है उसका कहना था इसलिए उसने विवाह नही करने का फैसला किया था।

उसके कहने के हिसाब से विवाह एक शारिरिक शुख के सिवा कुछ नही लेकिन ये बात गलत भी विवाह सिर्फ शारिरिक सुख तक सीमित नही।

ना जाने ऐसी सोच वाले भी अपनी इस दुनियाँ में है  अगर इसके जैसा सभी लोग सोचने लगे तो इस दुनिया का क्या होगा धीरे – धीरे दुनियाँ समाप्त हो जायेगी।

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